Sunday, 24 January 2016

एक मुर्देमे जान आयी

एक मुर्देमे फिरसे जान आयी
रंग रंगीली दुनिया उससे फिर भायी

हॉटेलमे जाकर खाना मंगवाया
उसे देखकर मालिक घबराया

दफ्तर में जाके कोने में छुप गया
दोस्तो की आवाजे सुनने लगा

एकने कहा मरा भी तो ऐसे दिन मरा
मेरी एक लीव्ह  बर्बाद कर गया

दुसरे ने कहा लडका पास हुआ है
नौकरी की तलाश में भटक रहा है

अब एक सीट खाली हो गयी है
मेरे लडके की तकदीर खुल गयी है

एकने कहा, बडा लफडेबाज था
रिश्तेदारो में बडा बदनाम था

दुखी होकर घर पहुचा
घरमें  पराया मर्द पाया

लडके आपस में झगड रहे थे
बट्वारे की बात कर रहे थे

जिंदगी की सच्चाई मरने के बाद समझ में आयी
मुर्दे की तो जान ही खतरे में आ गयी

कहत कबीरा सून मेरे भाइयो
सुखी होना है तो मुर्दा बनके ही रहीयो!!!

- नंदिनी मुळ्ये (कुमुद)